श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.9

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

महापद्मपतिः कश्‍चिन्‍नन्दः क्षत्रविनाशकृत्।

ततो नृपा भविष्यन्ति शूद्रप्रायास्त्वधार्मिकाः॥ ९

mahāpadmapatiḥ kaścinnandaḥ kṣatravināśakṛt|

tato nṛpā bhaviṣyanti śūdraprāyāstvadhārmikāḥ|| 9

अर्थ

अजयसे नन्दिवर्द्धन और उससे महानन्दिका जन्म होगा। शिशुनाग-वंशमें ये दस राजा होंगे। ये सब मिलकर कलियुगमें तीन सौ साठ वर्षतक पृथ्वीपर राज्य करेंगे। प्रिय परीक्षित्! महानन्दिकी शूद्रा पत्‍नीके गर्भसे नन्द नामका पुत्र होगा। वह बड़ा बलवान् होगा। महानन्दि ‘महापद्म’ नामक निधिका अधिपति होगा। इसीलिये लोग उसे ‘महापद्म’ भी कहेंगे। वह क्षत्रिय राजाओंके विनाशका कारण बनेगा। तभीसे राजालोग प्रायः शूद्र और अधार्मिक हो जायँगे॥ ७—९॥

यह अर्थ श्लोक 7–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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