श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.13

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स एव चन्द्रगुप्तं वै द्विजो राज्येऽभिषेक्ष्यति।

तत्सुतो वारिसारस्तु ततश्‍चाशोकवर्धनः॥ १३

sa eva candraguptaṃ vai dvijo rājye'bhiṣekṣyati|

tatsuto vārisārastu tataścāśokavardhanaḥ|| 13

अर्थ

वही ब्राह्मण पहले-पहल चन्द्रगुप्त मौर्यको राजाके पदपर अभिषिक्त करेगा। चन्द्रगुप्तका पुत्र होगा वारिसार और वारिसारका अशोकवर्द्धन॥ १३॥

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