श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सुयशा भविता तस्य संगतः सुयशःसुतः।

शालिशूकस्ततस्तस्य सोमशर्मा भविष्यति॥ १४

suyaśā bhavitā tasya saṃgataḥ suyaśaḥsutaḥ|

śāliśūkastatastasya somaśarmā bhaviṣyati|| 14

अर्थ

अशोकवर्द्धनका पुत्र होगा सुयश। सुयशका संगत, संगतका शालिशूक और शालिशूकका सोमशर्मा॥ १४॥

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