श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.31

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एते भोक्ष्यन्ति पृथिवीं दशवर्षशतानि च।

नवाधिकां च नवतिं मौना एकादश क्षितिम्॥ ३१

ete bhokṣyanti pṛthivīṃ daśavarṣaśatāni ca|

navādhikāṃ ca navatiṃ maunā ekādaśa kṣitim|| 31

अर्थ

मौनोंके अतिरिक्त ये सब एक हजार निन्यानबे वर्षतक पृथ्वीका उपभोग करेंगे। तथा ग्यारह मौन नरपति तीन सौ वर्षतक पृथ्वीका शासन करेंगे। जब उनका राज्यकाल समाप्त हो जायगा, तब किलिकिला नामकी नगरीमें भूतनन्द नामका राजा होगा। भूतनन्दका वंगिरि, वंगिरिका भाई शिशुनन्दि तथा यशोनन्दि और प्रवीरक—ये एक सौ छः वर्षतक राज्य करेंगे॥ ३१—३३॥

यह अर्थ श्लोक 31–33 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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