श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.37

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

प्रजाश्‍चाब्रह्मभूयिष्ठाः स्थापयिष्यति दुर्मतिः।

वीर्यवान् क्षत्रमुत्साद्य पद्मवत्यां स वै पुरि।

अनुगंगामाप्रयागं गुप्तां भोक्ष्यति मेदिनीम्॥ ३७

prajāścābrahmabhūyiṣṭhāḥ sthāpayiṣyati durmatiḥ|

vīryavān kṣatramutsādya padmavatyāṃ sa vai puri|

anugaṃgāmāprayāgaṃ guptāṃ bhokṣyati medinīm|| 37

अर्थ

इसकी बुद्धि इतनी दुष्ट होगी कि यह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्योंका नाश करके शूद्रप्राय जनताकी रक्षा करेगा। यह अपने बल-वीर्यसे क्षत्रियोंको उजाड़ देगा और पद्मवती पुरीको राजधानी बनाकर हरिद्वारसे लेकर प्रयागपर्यन्त सुरक्षित पृथ्वीका राज्य करेगा॥ ३७॥

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