महर्षे! तुम्हारी सारी कामनाएँ पूर्ण हों। इन्द्रियातीत परमात्मामें तुम्हारी अनन्य भक्ति सदा-सर्वदा बनी रहे। कल्पपर्यन्त तुम्हारा पवित्र यश फैले और तुम अजर एवं अमर हो जाओ॥ ३६॥
कामो महर्षे सर्वोऽयं भक्तिमांस्त्वमधोक्षजे।
आकल्पान्ताद् यशः पुण्यमजरामरता तथा॥ ३६
महर्षे! तुम्हारी सारी कामनाएँ पूर्ण हों। इन्द्रियातीत परमात्मामें तुम्हारी अनन्य भक्ति सदा-सर्वदा बनी रहे। कल्पपर्यन्त तुम्हारा पवित्र यश फैले और तुम अजर एवं अमर हो जाओ॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.10.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 963) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/10/36/