परम ज्ञानसम्पन्न मार्कण्डेय मुनिने भगवान्की योगमायासे जिस अद्भुत लीलाका अनुभव किया था, वह मैंने आपलोगोंको सुना दिया॥ ४०॥✎ 1785
अनुवर्णितमेतत्ते मार्कण्डेयस्य धीमतः।
अनुभूतं भगवतो मायावैभवमद्भुतम्॥ ४०
परम ज्ञानसम्पन्न मार्कण्डेय मुनिने भगवान्की योगमायासे जिस अद्भुत लीलाका अनुभव किया था, वह मैंने आपलोगोंको सुना दिया॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.10.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 963) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/10/40/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)