श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.39

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

सोऽप्यवाप्तमहायोगमहिमा भार्गवोत्तमः।

विचरत्यधुनाप्यद्धा हरावेकान्ततां गतः॥ ३९

so'pyavāptamahāyogamahimā bhārgavottamaḥ|

vicaratyadhunāpyaddhā harāvekāntatāṃ gataḥ|| 39

अर्थ

भृगुवंशशिरोमणि मार्कण्डेय मुनिको उनके महायोगका परम फल प्राप्त हो गया। वे भगवान्‌के अनन्यप्रेमी हो गये। अब भी वे भक्तिभावभरित हृदयसे पृथ्वीपर विचरण किया करते हैं॥ ३९॥✎ 1785

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1785 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अनादि-कालसे → अनादिकालसे

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