श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.8

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

सूत उवाच

इत्युक्त्वा तमुपेयाय भगवान् स सतां गतिः।

ईशानः सर्वविद्यानामीश्‍वरः सर्वदेहिनाम्॥ ८

ityuktvā tamupeyāya bhagavān sa satāṃ gatiḥ|

īśānaḥ sarvavidyānāmīśvaraḥ sarvadehinām|| 8

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! भगवान् शंकर समस्त विद्याओंके प्रवर्तक और सारे प्राणियोंके हृदयमें विराजमान अन्तर्यामी प्रभु हैं। जगत‍्के जितने भी संत हैं, उनके एकमात्र आश्रय और आदर्श भी वही हैं। भगवती पार्वतीसे इस प्रकार कहकर भगवान् शंकर मार्कण्डेय मुनिके पास गये॥ ८॥

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