श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.9

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तयोरागमनं साक्षादीशयोर्जगदात्मनोः।

न वेद रुद्धधीवृत्तिरात्मानं विश्‍वमेव च॥ ९

tayorāgamanaṃ sākṣādīśayorjagadātmanoḥ|

na veda ruddhadhīvṛttirātmānaṃ viśvameva ca|| 9

अर्थ

उस समय मार्कण्डेय मुनिकी समस्त मनोवृत्तियाँ भगवद्भावमें तन्मय थीं। उन्हें अपने शरीर और जगत‍्का बिलकुल पता न था। इसलिये उस समय वे यह भी न जान सके कि मेरे सामने सारे विश्‍वके आत्मा स्वयं भगवान् गौरी-शंकर पधारे हुए हैं॥ ९॥

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