शौनकजी! सर्वशक्तिमान् भगवान् कैलासपतिसे यह बात छिपी न रही कि मार्कण्डेय मुनि इस समय किस अवस्थामें हैं। इसलिये जैसे वायु अवकाशके स्थानमें अनायास ही प्रवेश कर जाती है, वैसे ही वे अपनी योगमायासे मार्कण्डेय मुनिके हृदयाकाशमें प्रवेश कर गये॥ १०॥
भगवांस्तदभिज्ञाय गिरीशो योगमायया।
आविशत्तद्गुहाकाशं वायुश्छिद्रमिवेश्वरः॥ १०
शौनकजी! सर्वशक्तिमान् भगवान् कैलासपतिसे यह बात छिपी न रही कि मार्कण्डेय मुनि इस समय किस अवस्थामें हैं। इसलिये जैसे वायु अवकाशके स्थानमें अनायास ही प्रवेश कर जाती है, वैसे ही वे अपनी योगमायासे मार्कण्डेय मुनिके हृदयाकाशमें प्रवेश कर गये॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.10.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 960) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/10/10/