श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.45

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

एता भगवतो विष्णोरादित्यस्य विभूतयः।

स्मरतां सन्ध्ययोर्नॄणां हरन्त्यंहो दिने दिने॥ ४५✎ 1246

etā bhagavato viṣṇorādityasya vibhūtayaḥ|

smaratāṃ sandhyayornṝṇāṃ harantyaṃho dine dine|| 45

अर्थ

शौनकजी! ये सब सूर्यरूप भगवान्‌की विभूतियाँ हैं। जो लोग इनका प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल स्मरण करते हैं, उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं॥ ४५॥✎ 1861

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1246 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सन्ध्ययोर्नृणां → सन्ध्ययोर्नॄणां
  • #1861 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): ४ ७॥ → ४७॥

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