स्मरतां सन्ध्ययोर्नॄणां हरन्त्यंहो दिने दिने॥ ४५✎ 1246
etā bhagavato viṣṇorādityasya vibhūtayaḥ|
smaratāṃ sandhyayornṝṇāṃ harantyaṃho dine dine|| 45
अर्थ
शौनकजी! ये सब सूर्यरूप भगवान्की विभूतियाँ हैं। जो लोग इनका प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल स्मरण करते हैं, उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं॥ ४५॥✎ 1861
एता भगवतो विष्णोरादित्यस्य विभूतयः।
स्मरतां सन्ध्ययोर्नॄणां हरन्त्यंहो दिने दिने॥ ४५
शौनकजी! ये सब सूर्यरूप भगवान्की विभूतियाँ हैं। जो लोग इनका प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल स्मरण करते हैं, उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.11.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 969) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/11/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1246 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सन्ध्ययोर्नृणां → सन्ध्ययोर्नॄणां