॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.11.6
एतद् वै पौरुषं रूपं भूः पादौ द्यौः शिरो नभः।
नाभिः सूर्योऽक्षिणी नासे वायुः कर्णौ दिशः प्रभोः॥ ६
etad vai pauruṣaṃ rūpaṃ bhūḥ pādau dyauḥ śiro nabhaḥ|
nābhiḥ sūryo'kṣiṇī nāse vāyuḥ karṇau diśaḥ prabhoḥ|| 6
अर्थ
यह भगवान्का ही पुरुषरूप है। पृथ्वी इसके चरण हैं, स्वर्ग मस्तक है, अन्तरिक्ष नाभि है, सूर्य नेत्र हैं, वायु नासिका है और दिशाएँ कान हैं॥ ६॥