भविष्यपुराणकी श्लोक-संख्या चौदह हजार पाँच सौ है और ब्रह्मवैवर्तपुराणकी अठारह हजार तथा लिंगपुराणमें ग्यारह हजार श्लोक हैं॥ ६॥
चतुर्दश भविष्यं स्यात्तथा पंचशतानि च।
दशाष्टौ ब्रह्मवैवर्तं लिंगमेकादशैव तु॥ ६
भविष्यपुराणकी श्लोक-संख्या चौदह हजार पाँच सौ है और ब्रह्मवैवर्तपुराणकी अठारह हजार तथा लिंगपुराणमें ग्यारह हजार श्लोक हैं॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 980) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/13/6/