श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.15

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अणुप्रायास्वोषधीषु शमीप्रायेषु स्थास्नुषु।

विद्युत्प्रायेषु मेघेषु शून्यप्रायेषु सद्मसु॥ १५

aṇuprāyāsvoṣadhīṣu śamīprāyeṣu sthāsnuṣu|

vidyutprāyeṣu megheṣu śūnyaprāyeṣu sadmasu|| 15

अर्थ

धान, जौ, गेहूँ आदि धान्योंके पौधे छोटे-छोटे होने लगेंगे। वृक्षोंमें अधिकांश शमीके समान छोटे और कँटीले वृक्ष ही रह जायँगे। बादलोंमें बिजली तो बहुत चमकेगी, परन्तु वर्षा कम होगी। गृहस्थोंके घर अतिथि-सत्कार या वेदध्वनिसे रहित होनेके कारण अथवा जनसंख्या घट जानेके कारण सूने-सूने हो जायँगे॥ १५॥

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