श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.19

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अश्‍वमाशुगमारुह्य देवदत्तं जगत्पतिः।

असिनासाधुदमनमष्टैश्‍वर्यगुणान्वितः ॥ १९

aśvamāśugamāruhya devadattaṃ jagatpatiḥ|

asināsādhudamanamaṣṭaiśvaryaguṇānvitaḥ || 19

अर्थ

श्रीभगवान् ही अष्टसिद्धियोंके और समस्त सद्गुणोंके एकमात्र आश्रय हैं। समस्त चराचर जगत‍्के वे ही रक्षक और स्वामी हैं। वे देवदत्त नामक शीघ्रगामी घोड़ेपर सवार होकर दुष्टोंको तलवारके घाट उतारकर ठीक करेंगे॥ १९॥

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