श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.29

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

विष्णोर्भगवतो भानुः कृष्णाख्योऽसौ दिवं गतः।

तदाविशत् कलिर्लोकं पापे यद् रमते जनः॥ २९

viṣṇorbhagavato bhānuḥ kṛṣṇākhyo'sau divaṃ gataḥ|

tadāviśat kalirlokaṃ pāpe yad ramate janaḥ|| 29

अर्थ

स्वयं सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान् भगवान् ही शुद्ध सत्त्वमय विग्रहके साथ श्रीकृष्णके रूपमें प्रकट हुए थे। वे जिस समय अपनी लीला संवरण करके परमधामको पधार गये, उसी समय कलियुगने संसारमें प्रवेश किया। उसीके कारण मनुष्योंकी मति-गति पापकी ओर ढुलक गयी॥ २९॥✎ 1924

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1924 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): परम-धामको → परमधामको

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