श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.36

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

एतेषां नामलिंगानां पुरुषाणां महात्मनाम्।

कथामात्रावशिष्टानां कीर्तिरेव स्थिता भुवि॥ ३६

eteṣāṃ nāmaliṃgānāṃ puruṣāṇāṃ mahātmanām|

kathāmātrāvaśiṣṭānāṃ kīrtireva sthitā bhuvi|| 36

अर्थ

राजन्! जिन पुरुषों और महात्माओंका वर्णन मैंने तुमसे किया है, अब केवल नामसे ही उनकी पहचान होती है। अब वे नहीं हैं, केवल उनकी कथा रह गयी है। अब उनकी कीर्ति ही पृथ्वीपर जहाँ-तहाँ सुननेको मिलती है॥ ३६॥

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