॥ श्रीहरिः ॥
ताविहैत्य कलेरन्ते वासुदेवानुशिक्षितौ।
वर्णाश्रमयुतं धर्मं पूर्ववत् प्रथयिष्यतः॥ ३८
tāvihaitya kalerante vāsudevānuśikṣitau|
varṇāśramayutaṃ dharmaṃ pūrvavat prathayiṣyataḥ|| 38
अर्थ
कलियुगके अन्तमें कल्किभगवान्की आज्ञासे वे फिर यहाँ आयेंगे और पहलेकी भाँति ही वर्णाश्रमधर्मका विस्तार करेंगे॥ ३८॥
ताविहैत्य कलेरन्ते वासुदेवानुशिक्षितौ।
वर्णाश्रमयुतं धर्मं पूर्ववत् प्रथयिष्यतः॥ ३८
कलियुगके अन्तमें कल्किभगवान्की आज्ञासे वे फिर यहाँ आयेंगे और पहलेकी भाँति ही वर्णाश्रमधर्मका विस्तार करेंगे॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.2.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 916) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/2/38/