श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.38

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ताविहैत्य कलेरन्ते वासुदेवानुशिक्षितौ।

वर्णाश्रमयुतं धर्मं पूर्ववत् प्रथयिष्यतः॥ ३८

tāvihaitya kalerante vāsudevānuśikṣitau|

varṇāśramayutaṃ dharmaṃ pūrvavat prathayiṣyataḥ|| 38

अर्थ

कलियुगके अन्तमें कल्किभगवान्‌की आज्ञासे वे फिर यहाँ आयेंगे और पहलेकी भाँति ही वर्णाश्रमधर्मका विस्तार करेंगे॥ ३८॥

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