श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.42

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कथं सेयमखण्डा भूः पूर्वैर्मे पुरुषैर्धृता।

मत्पुत्रस्य च पौत्रस्य मत्पूर्वा वंशजस्य वा॥ ४२

kathaṃ seyamakhaṇḍā bhūḥ pūrvairme puruṣairdhṛtā|

matputrasya ca pautrasya matpūrvā vaṃśajasya vā|| 42

अर्थ

वे लोग यही सोचा करते हैं कि मेरे दादा-परदादा इस अखण्ड भूमण्डलका शासन करते थे; अब यह मेरे अधीन किस प्रकार रहे और मेरे बाद मेरे बेटे-पोते, मेरे वंशज किस प्रकार इसका उपभोग करें॥ ४२॥

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