श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कथा इमास्ते कथिता महीयसां

विताय लोकेषु यशः परेयुषाम्।

विज्ञानवैराग्यविवक्षया विभो

वचोविभूतीर्न तु पारमार्थ्यम्॥ १४

kathā imāste kathitā mahīyasāṃ

vitāya lokeṣu yaśaḥ pareyuṣām|

vijñānavairāgyavivakṣayā vibho

vacovibhūtīrna tu pāramārthyam|| 14

अर्थ

परीक्षित्! संसारमें बड़े-बड़े प्रतापी और महान् पुरुष हुए हैं। वे लोकोंमें अपने यशका विस्तार करके यहाँसे चल बसे। मैंने तुम्हें ज्ञान और वैराग्यका उपदेश करनेके लिये ही उनकी कथा सुनायी है। यह सब वाणीका विलास मात्र है। इसमें पारमार्थिक सत्य कुछ भी नहीं है॥ १४॥

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