श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.17

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

युगानि युगधर्मांश्‍च मानं प्रलयकल्पयोः।

कालस्येश्‍वररूपस्य गतिं विष्णोर्महात्मनः॥ १७

yugāni yugadharmāṃśca mānaṃ pralayakalpayoḥ|

kālasyeśvararūpasya gatiṃ viṣṇormahātmanaḥ|| 17

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! मुझे तो कलियुगमें राशि-राशि दोष ही दिखायी दे रहे हैं। उस समय लोग किस उपायसे उन दोषोंका नाश करेंगे। इसके अतिरिक्त युगोंका स्वरूप, उनके धर्म, कल्पकी स्थिति और प्रलयकालके मान एवं सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान् भगवान्‌के कालरूपका भी यथावत् वर्णन कीजिये॥ १६-१७॥

यह अर्थ श्लोक 16–17 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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