॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.29
यदा लोभस्त्वसन्तोषो मानो दम्भोऽथ मत्सरः।
कर्मणां चापि काम्यानां द्वापरं तद् रजस्तमः॥ २९
yadā lobhastvasantoṣo māno dambho'tha matsaraḥ|
karmaṇāṃ cāpi kāmyānāṃ dvāparaṃ tad rajastamaḥ|| 29
अर्थ
जिस समय लोभ, असन्तोष, अभिमान, दम्भ और मत्सर आदि दोषोंका बोलबाला हो और मनुष्य बड़े उत्साह तथा रुचिके साथ सकाम कर्मोंमें लगना चाहे, उस समय द्वापरयुग समझना चाहिये। अवश्य ही रजोगुण और तमोगुणकी मिश्रित प्रधानताका नाम ही द्वापरयुग है॥ २९॥✎ 1453