॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.30
यदा मायानृतं तन्द्रा निद्रा हिंसा विषादनम्।
शोको मोहो भयं दैन्यं स कलिस्तामसः स्मृतः॥ ३०
yadā māyānṛtaṃ tandrā nidrā hiṃsā viṣādanam|
śoko moho bhayaṃ dainyaṃ sa kalistāmasaḥ smṛtaḥ|| 30
अर्थ
जिस समय झूठ-कपट, तन्द्रा-निद्रा, हिंसा-विषाद, शोक-मोह, भय और दीनताकी प्रधानता हो, उसे तमोगुण-प्रधान कलियुग समझना चाहिये॥ ३०॥✎ 1453