जिनके चित्तमें यह बात दृढ़ मूल हो गयी है कि यह पृथ्वी मेरी है, उन दुष्टोंके राज्यमें मेरे लिये पिता-पुत्र और भाई-भाई भी आपसमें लड़ बैठते हैं॥ ७॥
मत्कृते पितृपुत्राणां भ्रातॄणां चापि विग्रहः।
जायते ह्यसतां राज्ये ममताबद्धचेतसाम्॥ ७
जिनके चित्तमें यह बात दृढ़ मूल हो गयी है कि यह पृथ्वी मेरी है, उन दुष्टोंके राज्यमें मेरे लिये पिता-पुत्र और भाई-भाई भी आपसमें लड़ बैठते हैं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.3.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 917) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/3/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1240 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भ्रातृणां → भ्रातॄणां