हे शत्रुदमन! तत्त्वदर्शी लोग कहते हैं कि ब्रह्मासे लेकर तिनकेतक जितने प्राणी या पदार्थ हैं, सभी हर समय पैदा होते और मरते रहते हैं। अर्थात् नित्यरूपसे उत्पत्ति और प्रलय होता ही रहता है॥ ३५॥
नित्यदा सर्वभूतानां ब्रह्मादीनां परंतप।
उत्पत्तिप्रलयावेके सूक्ष्मज्ञाः सम्प्रचक्षते॥ ३५
हे शत्रुदमन! तत्त्वदर्शी लोग कहते हैं कि ब्रह्मासे लेकर तिनकेतक जितने प्राणी या पदार्थ हैं, सभी हर समय पैदा होते और मरते रहते हैं। अर्थात् नित्यरूपसे उत्पत्ति और प्रलय होता ही रहता है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.4.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 929) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/4/35/