श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.4.41

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

पुराणसंहितामेतामृषिर्नारायणोऽव्ययः ।

नारदाय पुरा प्राह कृष्णद्वैपायनाय सः॥ ४१

purāṇasaṃhitāmetāmṛṣirnārāyaṇo'vyayaḥ |

nāradāya purā prāha kṛṣṇadvaipāyanāya saḥ|| 41

अर्थ

जो कुछ मैंने तुम्हें सुनाया है, यही श्रीमद्भागवतपुराण है। इसे सनातन ऋषि नर-नारायणने पहले देवर्षि नारदको सुनाया था और उन्होंने मेरे पिता महर्षि कृष्णद्वैपायनको॥ ४१॥

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