श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.4.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एष प्राकृतिको राजन् प्रलयो यत्र लीयते।

आण्डकोशस्तु संघातो विघात उपसादिते॥ ६

eṣa prākṛtiko rājan pralayo yatra līyate|

āṇḍakośastu saṃghāto vighāta upasādite|| 6

अर्थ

राजन्! इसीका नाम प्राकृतिक प्रलय है। इस प्रलयमें प्रलयका कारण उपस्थित होनेपर पंचभूतोंके मिश्रणसे बना हुआ ब्रह्माण्ड अपना स्थूलरूप छोड़कर कारणरूपमें स्थित हो जाता है, घुल-मिल जाता है॥ ६॥

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