बहुत सर्पोंके भस्म होनेपर भी तक्षक न आया, यह देखकर परीक्षित्नन्दन राजा जनमेजयने ब्राह्मणोंसे कहा कि ‘ब्राह्मणो! अबतक सर्पाधम तक्षक क्यों नहीं भस्म हो रहा है?’॥ १८॥
अपश्यंस्तक्षकं तत्र राजा पारीक्षितो द्विजान्।
उवाच तक्षकः कस्मान्न दह्येतोरगाधमः॥ १८
बहुत सर्पोंके भस्म होनेपर भी तक्षक न आया, यह देखकर परीक्षित्नन्दन राजा जनमेजयने ब्राह्मणोंसे कहा कि ‘ब्राह्मणो! अबतक सर्पाधम तक्षक क्यों नहीं भस्म हो रहा है?’॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 934) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/18/