तेन संस्तम्भितः सर्पस्तस्मान्नाग्नौ पतत्यसौ॥ १९
taṃ gopāyati rājendra śakraḥ śaraṇamāgatam|
tena saṃstambhitaḥ sarpastasmānnāgnau patatyasau|| 19
अर्थ
ब्राह्मणोंने कहा—‘राजेन्द्र! तक्षक इस समय इन्द्रकी शरणमें चला गया है और वे उसकी रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने ही तक्षकको स्तम्भित कर दिया है, इसीसे वह अग्निकुण्डमें गिरकर भस्म नहीं हो रहा है’॥ १९॥
तं गोपायति राजेन्द्र शक्रः शरणमागतम्।
तेन संस्तम्भितः सर्पस्तस्मान्नाग्नौ पतत्यसौ॥ १९
ब्राह्मणोंने कहा—‘राजेन्द्र! तक्षक इस समय इन्द्रकी शरणमें चला गया है और वे उसकी रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने ही तक्षकको स्तम्भित कर दिया है, इसीसे वह अग्निकुण्डमें गिरकर भस्म नहीं हो रहा है’॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 934) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/19/