श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.41

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स्वधाम्‍नो ब्रह्मणः साक्षाद् वाचकः परमात्मनः।

स सर्वमन्त्रोपनिषद्वेदबीजं सनातनम्॥ ४१

svadhāmno brahmaṇaḥ sākṣād vācakaḥ paramātmanaḥ|

sa sarvamantropaniṣadvedabījaṃ sanātanam|| 41

अर्थ

ॐकार अपने आश्रय परमात्मा परब्रह्मका साक्षात् वाचक है और ॐकार ही सम्पूर्ण मन्त्र, उपनिषद् और वेदोंका सनातन बीज है॥ ४१॥

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