॥ श्रीहरिः ॥
स्वधाम्नो ब्रह्मणः साक्षाद् वाचकः परमात्मनः।
स सर्वमन्त्रोपनिषद्वेदबीजं सनातनम्॥ ४१
svadhāmno brahmaṇaḥ sākṣād vācakaḥ paramātmanaḥ|
sa sarvamantropaniṣadvedabījaṃ sanātanam|| 41
अर्थ
ॐकार अपने आश्रय परमात्मा परब्रह्मका साक्षात् वाचक है और ॐकार ही सम्पूर्ण मन्त्र, उपनिषद् और वेदोंका सनातन बीज है॥ ४१॥
स्वधाम्नो ब्रह्मणः साक्षाद् वाचकः परमात्मनः।
स सर्वमन्त्रोपनिषद्वेदबीजं सनातनम्॥ ४१
ॐकार अपने आश्रय परमात्मा परब्रह्मका साक्षात् वाचक है और ॐकार ही सम्पूर्ण मन्त्र, उपनिषद् और वेदोंका सनातन बीज है॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 938) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/41/