॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.6.42
तस्य ह्यासंस्त्रयो वर्णा अकाराद्या भृगूद्वह।
धार्यन्ते यैस्त्रयो भावा गुणनामार्थवृत्तयः॥ ४२
tasya hyāsaṃstrayo varṇā akārādyā bhṛgūdvaha|
dhāryante yaistrayo bhāvā guṇanāmārthavṛttayaḥ|| 42
अर्थ
शौनकजी! ॐकारके तीन वर्ण हैं —‘अ’, ‘उ’, और ‘म’। ये ही तीनों वर्ण सत्त्व, रज, तम—इन तीन गुणों; ऋक्, यजुः, साम—इन तीन नामों; भूः, भुवः, स्वः—इन तीन अर्थों और जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति—इन तीन वृत्तियोंके रूपमें तीन-तीनकी संख्यावाले भावोंको धारण करते हैं॥ ४२॥