श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.2

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आहुश्‍चिरायुषमृषिं मृकण्डतनयं जनाः।

यः कल्पान्ते उर्वरितो येन ग्रस्तमिदं जगत्॥ २

āhuścirāyuṣamṛṣiṃ mṛkaṇḍatanayaṃ janāḥ|

yaḥ kalpānte urvarito yena grastamidaṃ jagat|| 2

अर्थ

लोग कहते हैं कि मृकण्ड ऋषिके पुत्र मार्कण्डेय ऋषि चिरायु हैं और जिस समय प्रलयने सारे जगत‍्को निगल लिया था, उस समय भी वे बचे रहे॥ २॥

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