लोग कहते हैं कि मृकण्ड ऋषिके पुत्र मार्कण्डेय ऋषि चिरायु हैं और जिस समय प्रलयने सारे जगत्को निगल लिया था, उस समय भी वे बचे रहे॥ २॥
आहुश्चिरायुषमृषिं मृकण्डतनयं जनाः।
यः कल्पान्ते उर्वरितो येन ग्रस्तमिदं जगत्॥ २
लोग कहते हैं कि मृकण्ड ऋषिके पुत्र मार्कण्डेय ऋषि चिरायु हैं और जिस समय प्रलयने सारे जगत्को निगल लिया था, उस समय भी वे बचे रहे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 946) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/8/2/