sa vā asmatkulotpannaḥ kalpe'smin bhārgavarṣabhaḥ|
naivādhunāpi bhūtānāṃ samplavaḥ ko'pi jāyate|| 3
अर्थ
परन्तु सूतजी! वे तो इसी कल्पमें हमारे ही वंशमें उत्पन्न हुए एक श्रेष्ठ भृगुवंशी हैं और जहाँतक हमें मालूम है, इस कल्पमें अबतक प्राणियोंका कोई प्रलय नहीं हुआ है॥ ३॥
स वा अस्मत्कुलोत्पन्नः कल्पेऽस्मिन् भार्गवर्षभः।
नैवाधुनापि भूतानां सम्प्लवः कोऽपि जायते॥ ३
परन्तु सूतजी! वे तो इसी कल्पमें हमारे ही वंशमें उत्पन्न हुए एक श्रेष्ठ भृगुवंशी हैं और जहाँतक हमें मालूम है, इस कल्पमें अबतक प्राणियोंका कोई प्रलय नहीं हुआ है॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 946) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/8/3/