अब अप्सराएँ उनके सामने नाचने लगीं। कुछ गन्धर्व मधुर गान करने लगे तो कुछ मृदंग, वीणा, ढोल आदि बाजे बड़े मनोहर स्वरमें बजाने लगे॥ २४॥
ननृतुस्तस्य पुरतः स्त्रियोऽथो गायका जगुः।
मृदंगवीणापणवैर्वाद्यं चक्रुर्मनोरमम्॥ २४
अब अप्सराएँ उनके सामने नाचने लगीं। कुछ गन्धर्व मधुर गान करने लगे तो कुछ मृदंग, वीणा, ढोल आदि बाजे बड़े मनोहर स्वरमें बजाने लगे॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.8.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 949) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/8/24/