श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.28

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

विससर्ज तदा बाणं मत्वा तं स्वजितं स्मरः।

सर्वं तत्राभवन्मोघमनीशस्य यथोद्यमः॥ २८

visasarja tadā bāṇaṃ matvā taṃ svajitaṃ smaraḥ|

sarvaṃ tatrābhavanmoghamanīśasya yathodyamaḥ|| 28

अर्थ

कामदेवने अपना उपयुक्त अवसर देखकर और यह समझकर कि अब मार्कण्डेय मुनिको मैंने जीत लिया, उनके ऊपर अपना बाण छोड़ा। परन्तु उसकी एक न चली। मार्कण्डेय मुनिपर उसका सारा उद्योग निष्फल हो गया—ठीक वैसे ही, जैसे असमर्थ और अभागे पुरुषोंके प्रयत्‍न विफल हो जाते हैं॥ २८॥

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