श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.38

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तयोरासनमादाय पादयोरवनिज्य च।

अर्हणेनानुलेपेन धूपमाल्यैरपूजयत्॥ ३८

tayorāsanamādāya pādayoravanijya ca|

arhaṇenānulepena dhūpamālyairapūjayat|| 38

अर्थ

इसके बाद उन्होंने दोनोंको आसनपर बैठाया, बड़े प्रेमसे उनके चरण पखारे और अर्घ्य, चन्दन, धूप और माला आदिसे उनकी पूजा करने लगे॥ ३८॥ भगवान् नर-नारायण सुखपूर्वक आसनपर विराजमान थे और मार्कण्डेयजीपर कृपा-प्रसादकी वर्षा कर रहे थे। पूजाके अनन्तर मार्कण्डेय मुनिने उन सर्वश्रेष्ठ मुनिवेषधारी नर-नारायणके चरणोंमें प्रणाम किया और यह स्तुति की॥ ३९॥

यह व्याख्या श्लोक 12.8.38 से 12.8.39 तककी एक साथ है।

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