श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.39

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सुखमासनमासीनौ प्रसादाभिमुखौ मुनी।

पुनरानम्य पादाभ्यां गरिष्ठाविदमब्रवीत्॥ ३९

sukhamāsanamāsīnau prasādābhimukhau munī|

punarānamya pādābhyāṃ gariṣṭhāvidamabravīt|| 39

अर्थ

भगवान् नर-नारायण सुखपूर्वक आसनपर विराजमान थे और मार्कण्डेयजीपर कृपा-प्रसादकी वर्षा कर रहे थे। पूजाके अनन्तर मार्कण्डेय मुनिने उन सर्वश्रेष्ठ मुनिवेषधारी नर-नारायणके चरणोंमें प्रणाम किया और यह स्तुति की॥ ३९॥

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