इस प्रकार मार्कण्डेय मुनि विष्णुभगवान्की मायाके चक्करमें मोहित हो रहे थे। उस प्रलयकालके समुद्रमें भटकते-भटकते उन्हें सैकड़ों-हजारों ही नहीं, लाखों-करोड़ों वर्ष बीत गये॥ १९॥
अयुतायुतवर्षाणां सहस्राणि शतानि च।
व्यतीयुर्भ्रमतस्तस्मिन् विष्णुमायावृतात्मनः॥ १९
इस प्रकार मार्कण्डेय मुनि विष्णुभगवान्की मायाके चक्करमें मोहित हो रहे थे। उस प्रलयकालके समुद्रमें भटकते-भटकते उन्हें सैकड़ों-हजारों ही नहीं, लाखों-करोड़ों वर्ष बीत गये॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.9.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 956) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/9/19/