श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

स कदाचिद् भ्रमंस्तस्मिन् पृथिव्याः ककुदि द्विजः।

न्यग्रोधपोतं ददृशे फलपल्लवशोभितम्॥ २०

sa kadācid bhramaṃstasmin pṛthivyāḥ kakudi dvijaḥ|

nyagrodhapotaṃ dadṛśe phalapallavaśobhitam|| 20

अर्थ

शौनकजी! मार्कण्डेय मुनि इसी प्रकार प्रलयके जलमें बहुत समयतक भटकते रहे। एक बार उन्होंने पृथ्वीके एक टीलेपर एक छोटा-सा बरगदका पेड़ देखा। उसमें हरे-हरे पत्ते और लाल-लाल फल शोभाय-मान हो रहे थे॥ २०॥

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