श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.41

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

महातलं तु गुल्फाभ्यां प्रपदाभ्यां रसातलम्।

पातालं पादतलत इति लोकमयः पुमान्॥ ४१

mahātalaṃ tu gulphābhyāṃ prapadābhyāṃ rasātalam|

pātālaṃ pādatalata iti lokamayaḥ pumān|| 41

अर्थ

एड़ीके ऊपरकी गाँठोंमें महातल, पंजे और एड़ियोंमें रसातल और तलुओंमें पाताल समझना चाहिये। इस प्रकार विराट् पुरुष सर्वलोकमय है ॥ ४१॥

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