परीक्षित्! जब देवर्षि नारदने देखा कि मेरे लोकपितामह पिताजी मुझपर प्रसन्न हैं, तब उन्होंने उनसे यही प्रश्न किया, जो तुम मुझसे कर रहे हो॥ ४२॥✎ 176177178179
तुष्टं निशाम्य पितरं लोकानां प्रपितामहम्।
देवर्षिः परिपप्रच्छ भवान् यन्मानुपृच्छति॥ ४२
परीक्षित्! जब देवर्षि नारदने देखा कि मेरे लोकपितामह पिताजी मुझपर प्रसन्न हैं, तब उन्होंने उनसे यही प्रश्न किया, जो तुम मुझसे कर रहे हो॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.9.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 227) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/9/42/