इस प्रकार भारतवर्षमें ही विचरते-विचरते जबतक वे प्रभासक्षेत्रमें पहुँचे, तबतक भगवान् श्रीकृष्णकी सहायतासे महाराज युधिष्ठिर पृथ्वीका एकच्छत्र अखण्ड राज्य करने लगे थे॥ २०॥
इत्थं व्रजन् भारतमेव वर्षं
कालेन यावद्गतवान् प्रभासम्।
तावच्छशास क्षितिमेकचक्रा-
मेकातपत्रामजितेन पार्थः॥ २०
इस प्रकार भारतवर्षमें ही विचरते-विचरते जबतक वे प्रभासक्षेत्रमें पहुँचे, तबतक भगवान् श्रीकृष्णकी सहायतासे महाराज युधिष्ठिर पृथ्वीका एकच्छत्र अखण्ड राज्य करने लगे थे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 237) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/1/20/