॥ श्रीहरिः ॥
यदात्थ बहुरूपस्य हरेरद्भुतकर्मणः।
कालाख्यं लक्षणं ब्रह्मन् यथा वर्णय नः प्रभो॥ १०
yadāttha bahurūpasya hareradbhutakarmaṇaḥ|
kālākhyaṃ lakṣaṇaṃ brahman yathā varṇaya naḥ prabho|| 10
अर्थ
विदुरजीने कहा—ब्रह्मन्! आपने अद्भुतकर्मा विश्वरूप श्रीहरिकी जिस काल नामक शक्तिकी बात कही थी, प्रभो! उसका कृपया विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये॥ १०॥
यदात्थ बहुरूपस्य हरेरद्भुतकर्मणः।
कालाख्यं लक्षणं ब्रह्मन् यथा वर्णय नः प्रभो॥ १०
विदुरजीने कहा—ब्रह्मन्! आपने अद्भुतकर्मा विश्वरूप श्रीहरिकी जिस काल नामक शक्तिकी बात कही थी, प्रभो! उसका कृपया विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 279) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/10/