श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ये च मे भगवन् पृष्टास्त्वय्यर्था बहुवित्तम।

तान् वदस्वानुपूर्व्येण छिन्धि नः सर्वसंशयान्॥ २

ye ca me bhagavan pṛṣṭāstvayyarthā bahuvittama|

tān vadasvānupūrvyeṇa chindhi naḥ sarvasaṃśayān|| 2

अर्थ

भगवन्! इनके सिवा मैंने आपसे और जो-जो बातें पूछी हैं, उन सबका भी क्रमशः वर्णन कीजिये और मेरे सब संशयोंको दूर कीजिये; क्योंकि आप सभी बहुज्ञोंमें श्रेष्ठ हैं॥ २॥

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