श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

पद्मकोशं तदाऽऽविश्य भगवत्कर्मचोदितः।

एकं व्यभाङ्क्षीदुरुधा त्रिधा भाव्यं द्विसप्तधा॥ ८

padmakośaṃ tadā''viśya bhagavatkarmacoditaḥ|

ekaṃ vyabhāṅkṣīdurudhā tridhā bhāvyaṃ dvisaptadhā|| 8

अर्थ

तब भगवान्‌के द्वारा सृष्टिकार्यमें नियुक्त ब्रह्माजीने उस कमलकोशमें प्रवेश किया और उस एकके ही भूः, भुवः, स्वः—ये तीन भाग किये, यद्यपि वह कमल इतना बड़ा था कि उसके चौदह भुवन या इससे भी अधिक लोकोंके रूपमें विभाग किये जा सकते थे॥ ८॥

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