॥ श्रीहरिः ॥
भगवान् वेद कालस्य गतिं भगवतो ननु।
विश्वं विचक्षते धीरा योगराद्धेन चक्षुषा॥ १७
bhagavān veda kālasya gatiṃ bhagavato nanu|
viśvaṃ vicakṣate dhīrā yogarāddhena cakṣuṣā|| 17
अर्थ
आप भगवान् कालकी गति भलीभाँति जानते हैं; क्योंकि ज्ञानीलोग अपनी योगसिद्ध दिव्य दृष्टिसे सारे संसारको देख लेते हैं॥ १७॥
भगवान् वेद कालस्य गतिं भगवतो ननु।
विश्वं विचक्षते धीरा योगराद्धेन चक्षुषा॥ १७
आप भगवान् कालकी गति भलीभाँति जानते हैं; क्योंकि ज्ञानीलोग अपनी योगसिद्ध दिव्य दृष्टिसे सारे संसारको देख लेते हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 284) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/11/17/