श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

भगवान् वेद कालस्य गतिं भगवतो ननु।

विश्‍वं विचक्षते धीरा योगराद्धेन चक्षुषा॥ १७

bhagavān veda kālasya gatiṃ bhagavato nanu|

viśvaṃ vicakṣate dhīrā yogarāddhena cakṣuṣā|| 17

अर्थ

आप भगवान् कालकी गति भलीभाँति जानते हैं; क्योंकि ज्ञानीलोग अपनी योगसिद्ध दिव्य दृष्टिसे सारे संसारको देख लेते हैं॥ १७॥

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