श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.18

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्।

दिव्यैर्द्वादशभिर्वर्षैः सावधानं निरूपितम्॥ १८

kṛtaṃ tretā dvāparaṃ ca kaliśceti caturyugam|

divyairdvādaśabhirvarṣaiḥ sāvadhānaṃ nirūpitam|| 18

अर्थ

मैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलि—ये चार युग अपनी सन्ध्या और सन्ध्यांशोंके सहित देवताओंके बारह सहस्र वर्षतक रहते हैं, ऐसा बतलाया गया है॥ १८॥✎ 246 247

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #246 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #247 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥यह → २४॥ यह

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