श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.28

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तमेवान्वपिधीयन्ते लोका भूरादयस्त्रयः।

निशायामनुवृत्तायां निर्मुक्तशशिभास्करम्॥ २८

tamevānvapidhīyante lokā bhūrādayastrayaḥ|

niśāyāmanuvṛttāyāṃ nirmuktaśaśibhāskaram|| 28

अर्थ

उस समय सारा विश्‍व उन्हींमें लीन हो जाता है। जब सूर्य और चन्द्रमादिसे रहित वह प्रलयरात्रि आती है, तब वे भूः, भुवः, स्वः—तीनों लोक उन्हीं ब्रह्माजीके शरीरमें छिप जाते हैं॥ २८॥✎ 246 247

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #246 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #247 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥यह → २४॥ यह

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