श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

त्रिलोक्यां दह्यमानायां शक्‍त्या सङ्कर्षणाग्‍निना।

यान्त्यूष्मणा महर्लोकाज्जनं भृग्वादयोऽर्दिताः॥ २९

trilokyāṃ dahyamānāyāṃ śaktyā saṅkarṣaṇāgninā|

yāntyūṣmaṇā maharlokājjanaṃ bhṛgvādayo'rditāḥ|| 29

अर्थ

उस अवसरपर तीनों लोक शेषजीके मुखसे निकली हुई अग्‍निरूप भगवान्‌की शक्तिसे जलने लगते हैं। इसलिये उसके तापसे व्याकुल होकर भृगु आदि मुनीश्‍वरगण महर्लोकसे जनलोकको चले जाते हैं॥ २९॥✎ 246 247

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #246 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #247 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥यह → २४॥ यह

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