उस अवसरपर तीनों लोक शेषजीके मुखसे निकली हुई अग्निरूप भगवान्की शक्तिसे जलने लगते हैं। इसलिये उसके तापसे व्याकुल होकर भृगु आदि मुनीश्वरगण महर्लोकसे जनलोकको चले जाते हैं॥ २९॥✎ 246247
त्रिलोक्यां दह्यमानायां शक्त्या सङ्कर्षणाग्निना।
यान्त्यूष्मणा महर्लोकाज्जनं भृग्वादयोऽर्दिताः॥ २९
उस अवसरपर तीनों लोक शेषजीके मुखसे निकली हुई अग्निरूप भगवान्की शक्तिसे जलने लगते हैं। इसलिये उसके तापसे व्याकुल होकर भृगु आदि मुनीश्वरगण महर्लोकसे जनलोकको चले जाते हैं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 285) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)